Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 108, Verse 2
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 108, verse 2 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 108 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
कर्मवातापनुन्नेषु सरसेष्वरसेष्वपि ।
पतत्सु वासरौघेषु शीर्णपर्णगणेष्विव ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे वायु से प्रेरित जीर्ण-शीर्ण पत्ते उड़ते हैं वैसे ही कर्मरूपी वायु से
प्रेरित सुखयुक्त ओर दुःखयुक्त मेरे दिन बीतने लगे