Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 106, Verse 54
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 106, verse 54 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 106 · श्लोक 54
संस्कृत श्लोक
जम्बूफलरसः पीतः स भुक्तः पक्कणौदनः ।
विश्रान्तं च मया तत्र मोहापहृतचेतसा ॥ ५४ ॥
हिन्दी अर्थ
मोह से मेरा चित्त हरा जा चुका था, अतएव
मैंने वह भीलों के ग्राम का भात खाया और जामुन का रस पीया ओर वहाँ पर विश्राम भी
किया