Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 105, Verse 9
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 105, verse 9 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 105 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
त्वयीत्थं संस्थिते देव वयमत्यन्तमाकुलाः ।
अभेद्यमपि भिन्दन्ति निर्निमित्तं भ्रमा मनः ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
महाराज,
आपकी ऐसी हालत होने पर हम अत्यन्त व्याकुल हैं । यद्यपि मन अभेद्य है तथापि भ्रम उसका
भेदन किसी कारण के बिना कर डालते हैं