Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 103, Verse 7
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 103, verse 7 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 103 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
सदसत्तां नयत्याशु सत्तां वा सन्नयत्यलम् ।
तादृशान्येव चादत्ते सुखदुःखानि भावितम् ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
वह सत् पदार्थ
को असत् बना देता है और असत् को सर्वथा सत् बना डालता है । तदनुरूप ही सुख-दुःखों
का ग्रहण करता है