Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 103, Verse 5
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 103, verse 5 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 103 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
यदिदं दृश्यते किंचिज्जगत्स्थास्नु चरिष्णु च ।
सर्वं सर्वप्रकाराढ्यं चित्तादेतदुपागतम् ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
जो
कुछ भी स्थावर जंगम (चराचर) जगत् दिखाई देता है, सम्पूर्ण पदार्थों से भरा हुआ यह सारा
जगत् चित्त से ही उदित हुआ है