Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 102, Verse 13
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 102, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 102 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
देहः पततु वोदेतु का नः क्षतिरुपस्थिता ।
को नष्टः प्रक्षते पुष्पे आमोदो व्योमसंश्रयः ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
देह चाहे नष्ट हो चाहे अभ्युदय को प्राप्त हो इससे हमारी कौन हानि हुई ?
फूल के छिन्न-भिन्न हो जाने पर आकाश में रहनेवाली फूल की कौन महक नष्ट हुई ?