Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 101, Verse 29
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 101, verse 29 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 101 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
आख्यायिकैषा कथिता मया रम्या तवानघ ।
एतां हृदि कुरु प्राज्ञ विदग्धस्त्वं भविष्यसि ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
हे अनघ वत्स, यह बड़ी सुन्दर आख्यायिका मैंने तुमसे कही है । इसे तुम
हृदयंगम करो । इससे तुम अवश्य पण्डित हो जाओगे