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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 100, Verse 3

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 100, verse 3 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 100 · श्लोक 3

संस्कृत श्लोक

मनो रामाप्रबुद्धानां संसारभ्रमकारणम् । अपश्यतोऽम्बुसामान्यमन्यताम्बुतरङ्गयोः ॥ ३ ॥

हिन्दी अर्थ

हे श्रीरामचन्द्रजी, जैसे जल ओर तरंगमें, जलसत्ता को न देख रहे पुरुष को, भेद प्रतीत होता है वैसे ही अज्ञानी पुरुषों का मन संसारभ्रम का कारण है