Yoga Vasistha — Mumukshu Vyavahara Prakarana (Conduct of the Seeker), Sarga 9, Verse 3
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Mumukshu Vyavahara Prakarana (Conduct of the Seeker), Sarga 9, verse 3 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
मुमुक्षु-व्यवहार प्रकरण · सर्ग 9 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
दैवं न किंचित्कुरुते न भुङ्ते न च विद्यते ।
न दृश्यते नाद्रियते केवलं कल्पनेदृशी ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
ऐसा बोधन करने के लिए करणभूत पुरुषप्रयत्न मे फलकर्तृत्वका कथन किया गया है, यह
तात्पर्य है ।
दैव न कुछ करता है, न भोग करता है, न उसका अस्तित्व है, न दिखाई देता है, एवं न तो
विवेकी पुरुष द्वारा उसका आदर किया जाता है, पर अनादि रूढ भ्रान्ति से केवल मूढो ने
उसकी कल्पना कर रक्खी है