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Yoga Vasistha — Mumukshu Vyavahara Prakarana (Conduct of the Seeker), Sarga 20, Verse 3

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Mumukshu Vyavahara Prakarana (Conduct of the Seeker), Sarga 20, verse 3 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

मुमुक्षु-व्यवहार प्रकरण · सर्ग 20 · श्लोक 3

संस्कृत श्लोक

महापुरुषता ह्येषा शमादिगुणशालिनी । सम्यग्ज्ञानं विना राम सिद्धिमेति न कांचन ॥ ३ ॥

हिन्दी अर्थ

हे श्रीरामजी, शम आदि गुणों से परिपूर्ण यह महापुरुषता यथार्थ ज्ञान के बिना किसी प्रकार की सिद्धि से प्राप्त नहीं होती । जैसे वृष्टि से नवीन अंकुर बढते हैं, वैसे ही आत्मसुख के आविभव से प्रशंसाके योग्य सत्पुरुषो के शम आदि आचार और अमानित्व आदि ज्ञान से वृद्धि को प्राप्त होते हैं