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Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 9, Verses 9–10

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 9, verses 9–10 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 9 · श्लोक 9,10

संस्कृत श्लोक

स्वधर्मं प्रतिपद्यस्व न धर्मं हातुमर्हसि । मुनेस्त्रिभुवनेशस्य वचनं कर्तुमर्हसि ॥ ९ ॥ करिष्यामीति संश्रुत्य तत्ते राजन्नकुर्वतः । इष्टापूर्तं हरेद्धर्मं तस्माद्रामं विसर्जय ॥ १० ॥

हिन्दी अर्थ

तुम्हारे कुल में उत्पन्न हुए पहले के राजाओं ने प्रतिज्ञापालन आदि धर्मो का कितनी दृढ़ता के साथ परिपालन किया था, उसे स्मरण करो और तीनों लोकों में अभीष्ट प्राप्त करने में समर्थ महर्षि विश्वामित्र के वाक्य का आदरपूर्वक पालन करो । “आपकी आज्ञा का पालन करूँगा' यों प्रतिज्ञा करके उससे अपना मुँह मोड़ लोगे, तो तुम्हारे सम्पूर्ण इष्ट, पूर्तं (बावली, कूप, तालाब आदि) आदि धर्म नष्ट हो जायेंगे, इसलिए महामुनि विश्वामित्र के साथ श्रीरामचन्द्र को भेजो