Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 6, Verse 27
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 6, verse 27 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 6 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
दशरथ उवाच ।
अशङ्कितोपनीतेन भास्वता दर्शनेन ते ।
साधो स्वनुगृहीताः स्मो रविणेवाम्बुजाकराः ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
महाराज दशरथ ने कहा :
भगवन्, जैसे सूर्य अपने तेजोमय दर्शन द्वारा कमल के तालाबों पर अनुग्रह करते हे, वैसे ही अनायास
प्राप्त आपके अद्भूत तेजोमय दर्शनों से हम लोग अत्यन्त अनुगृहीत हुए हैं