Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 3, Verses 25–27
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 3, verses 25–27 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 3 · श्लोक 25-27
संस्कृत श्लोक
शुभे नक्षत्रदिवसे भ्रातृभ्यां सह राघवः ।
मङ्गलालंकृतवपुः कृतस्वस्त्ययनो द्विजैः ॥ २५ ॥
वसिष्ठप्रहितैर्विप्रैः शास्त्रज्ञैश्च समन्वितः ।
स्निग्धैः कतिपयैरेव राजपुत्रवरैः सह ॥ २६ ॥
अम्बाभिर्विहिताशीभिरालिङ्ग्यालिङ्ग्य भूषितः ।
निरगात्स्वगृहात्तस्मात्तीर्थयात्रार्थमुद्यतः ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
शुभ नक्षत्र ओर शुभ दिन
में ब्राह्मणों द्वारा मंगलपाठ कराकर एवं मंगलमय वेश-भूषा से शरीर को अलंकृत कर, आशीर्वाद दे रहीं
माताओं द्वारा पुन: पुन: आलिंगन कर खूब विभूषित किये गये श्रीरामचन्द्रजी भाइयों, वसिष्ठ द्वारा प्रेषित
शास्त्रज्ञ ब्राह्मणों, कतिपय अपने प्रेमी श्रेष्ठ राजकुमारों के साथ तीर्थयात्रा के लिए अपने घर से
निकले