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Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 3, Verse 19

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 3, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 3 · श्लोक 19

संस्कृत श्लोक

अथ गच्छति काले तु पालयत्यवनिं नृपे । प्रजासु वीतशोकासु स्थितासु विगतज्वरम् ॥ १९ ॥

हिन्दी अर्थ

तदनन्तर कुछ समय बीतने पर जब कि महाराज दशरथ पृथिवी का पालन करते थे, शोकरहित प्रजा बड़े आनन्द में थी । राज्य की सुव्यवस्था से प्रजाओं में ज्वरादि पीड़ा भी नहीं थी, भय, अकालमरण आदि अन्य पीड़ाओं की तो बात ही क्या थी ?