Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 23, Verses 5–6
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 23, verses 5–6 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 23 · श्लोक 5,6
संस्कृत श्लोक
समस्तसामान्यतया भीमः कालो महेश्वरः ।
दृश्यसत्तामिमां सर्वां कवलीकर्तुमुद्यतः ॥ ५ ॥
महतामपि नो देवः प्रतिपालयति क्षणम् ।
कालः कवलितानन्तविश्वो विश्वात्मतां गतः ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
भयंकर रुद्ररूपी काल सर्वसाधारणरूप से इस सम्पूर्ण दृश्य प्रपंच को निगलने के लिए सदा
उद्यत रहता हे । असंख्य ब्रह्माण्डों को अपने उदरस्थ करने के कारण सर्वात्मता को प्राप्त हुआ, यह
काल बल, बुद्धि ओर वैभव आदि से महान् भूतो के लिए एक क्षणभर भी नहीं ठहरता अर्थात् सबको
तुरन्त नष्ट कर देता है