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Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 22, Verse 26

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 22, verse 26 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 22 · श्लोक 26

संस्कृत श्लोक

काचिदस्ति जगत्यस्मिन्नामङ्गलकरी तथा । यथा जराक्रोशकरी देहजङ्गलजम्बुकी ॥ २६ ॥

हिन्दी अर्थ

इस संसार में ऐसी अमंगलकारिणी कोई नहीं है, जैसे कि रोदन करनेवाली (शब्द करनेवाली) देहरूपी जंगल की सियारिन यह वृद्धावस्था है अर्थात्‌ जैसा जंगल की सियारिन के वासनेसे अमंगल होता है वेसा किसीसे नहीं होता । यह वृद्धावस्था भी ठीक सियारिन के समान है, यह भी रोदन करनेवाली है ओर सबसे बढ़कर दुःखदायिनी है