Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 22, Verse 19
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 22, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 22 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
दृष्ट्वैव सोत्सुकेवाशु प्रगृह्य शिरसि क्षणम् ।
प्रलुनाति जरा देहं कुमारी कैरवं यथा ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे वालिका उत्सुकता के साथ देखकर
ओर सिर पकड़कर कमल के फूल को तोड़ लेती हे, वैसे ही वृद्धावस्था भी बड़ी उत्सुकता के साथ
देखकर ओर सिर पकड़कर देह को काट देती है, नष्टकर देती है