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Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 21, Verse 9

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 21, verse 9 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 21 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

विपुलोल्लासदायिन्या मदमन्मथपूर्वकम् । को विशेषो विकारिण्या मदिरायाः स्त्रियास्तथा ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

हे मुनीश्वर, मद से अनेक प्रकार का आनन्द देनेवाली और पतन, दंगा, फसाद आदि विविध अनर्थ करानेवाली मदिरा में और काम से विविध आनन्द देनेवाली और स्वयं काम विकार से युक्त स्त्री में क्या अन्तर है ? यह भाव है कि स्त्री काम द्वारा विविध प्रकार के उल्लासो को देती है, और स्वयं कामविकार से युक्त रहती है ओर मदिरा मादकशक्ति द्वारा विविध प्रकार के उललासों को देती है और स्वयं जव आदि के विकार से या स्खलन, कलह आदि विकार से युक्त है, इसलिए दोनों समान हैं, अर्थात्‌ जैसे श्रेय चाहनेवाले पुरुष के लिए मदिरा हेय है, वैसे ही स्त्री भी हेय है