Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 21, Verse 35
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 21, verse 35 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 21 · श्लोक 35
संस्कृत श्लोक
यस्य स्त्री तस्य भोगेच्छा निःस्त्रीकस्य क्व भोगभूः ।
स्त्रियं त्यक्त्वा जगत्त्यक्तं जगत्त्यक्त्वा सुखी भवेत् ॥ ३५ ॥
हिन्दी अर्थ
जिसकी स्त्री है, उसको भोग की इच्छा होती है,
जिसकी स्त्री नहीं है, उसे भोग की संभावना ही कहाँ है, सत्री का यदि त्याग कर दिया तो जगत् का त्याग
कर दिया, जगत् का त्याग करके सुखी होवे