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Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 21, Verse 19

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 21, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 21 · श्लोक 19

संस्कृत श्लोक

ललनाविपुलालाने मनोमत्तमतंगजः । रतिशृङ्खलया ब्रह्मन्बद्धस्तिष्ठति मूकवत् ॥ १९ ॥

हिन्दी अर्थ

स्त्रीरूपी विशाल आलान मेँ (हाथी को बोधने के खूँटे में) रतिरूपी (प्रेमरूपी) जंजीर से बधा हुआ मनरूपी मदोन्मत्त हाथी गूगि के समान चुपचाप बैठा रहता है, अर्थात्‌ असमर्थ होने के कारण अपने छुटकारे के लिए किसी उपाय का अवलम्बन नहीं कर सकता