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Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 19, Verse 2

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 19, verse 2 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 19 · श्लोक 2

संस्कृत श्लोक

अशक्तिरापदस्तृष्णा मूकता मूढबुद्धिता । गृध्नुता लोलता दैन्यं सर्वं बाल्ये प्रवर्तते ॥ २ ॥

हिन्दी अर्थ

जिसकी पहले प्रतिज्ञा की थी, उसी अर्थ का विस्तार से वर्णन करते हैं। अशक्ति (असामर्थ्य), आपत्तियाँ, खाने-पीने आदि की तृष्णा, मूकता, (बोल न सकना), मूढबुद्धिता (जान न सकना), क्रीडा, कौतुक आदि के विषय में अभिलाषा करना, न मिलने पर दीन- हीन बन जाना ओर चंचलता- ये सब बाल्यावस्था में ही होते हैँ