Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 18, Verse 59
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 18, verse 59 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 59
संस्कृत श्लोक
कायोऽयमचिरापायो बुद्बुदोऽम्बुनिधाविव ।
व्यर्थं कार्यपरावर्ते परिस्फुरति निष्फलः ॥ ५९ ॥
हिन्दी अर्थ
समुद्र में उत्पन्न हुए जल के बुद्बुदों की
नाई इस शरीर का विनाश बहुत शीघ्र हो जाता है, यह संसार में परिभ्रमणरूपी जलर्भवर में व्यर्थ ही
प्रकाश को प्राप्त होता है । न तो संसार में परिभ्रमण से इसका कोई प्रयोजन सिद्ध होता है और न इससे
किसी दूसरे का ही प्रयोजन सिद्ध होता हे