Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 18, Verse 56
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 18, verse 56 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 56
संस्कृत श्लोक
प्रज्ञा वराका सर्वैव कायबद्धास्थयानया ।
मिथ्याज्ञानकुराक्षस्या छलिता कष्टमेकिका ॥ ५६ ॥
हिन्दी अर्थ
शरीर को ही सब कुछ
समझनेवाली इस मिथ्याज्ञानरूपिणी राक्षसीने अकेली अतएव दीन-हीन प्रज्ञा (सुबुद्धि) को पूर्णरूप
से ठग लिया, यह बडे कष्ट की बात है