Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 15, Verse 2

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 15, verse 2 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 15 · श्लोक 2

संस्कृत श्लोक

अहंकारवशादेव दोषकोशकदर्थताम् । ददाति दीनदीनानां संसारो विविधाकृतिः ॥ २ ॥

हिन्दी अर्थ

संसार एक आकारवाला नहीं है। उसके विविध प्रकार हैँ । साध्य, साधन, फल, प्रवृत्ति-ये सभी संसार के आकार हैं उक्त विविध आकारवाला संसार अनादिकाल से लेकर जन्म, मरण, नरक आदि अनन्त दुःखपरम्पराका अनुभव करके भी फिर फिर उक्त दुःख परम्परा के हेतु तुच्छ सुखों को अनेक कष्टो से चाहनेवाले इसीलिए दीनों से भी दीन विषयलम्पट लोगों को निरन्तर राग-द्वेष आदि दोषों में विक्षिप्त और कलंकित करता है । यह सब अहंकार का ही प्रसाद है, दूसरे का नहीं