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Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 14, Verse 13

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 14, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

वैराग्य प्रकरण · सर्ग 14 · श्लोक 13

संस्कृत श्लोक

भारोऽविवेकिनः शास्त्रं भारो ज्ञानं च रागिणः । अशान्तस्य मनो भारो भारोऽनात्मविदो वपुः ॥ १३ ॥

हिन्दी अर्थ

अपवित्र देह में आत्मबुद्धि करनेवाले अविवेकी के लिए शास्त्र भाररूप है अर्थात्‌ भार के समान व्यर्थ श्रम का ही कारण है । विषयानुरागी पुरुष के लिए तत्त्वज्ञान भार है, अशान्त पुरुष के लिए मन भार है और अनात्मवान्‌ के लिए शरीर भार है