Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 13, Verse 9
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 13, verse 9 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 13 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
प्राज्ञाः शूराः कृतज्ञाश्च पेशला मृदवश्च ये ।
पांसुमुष्ट्येव मणयः श्रिया ते मलिनीकृताः ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे धूलि की
मुडी मणियों को मलिन कर देती है, वैसे ही बड़े-बड़े विद्वान् शूरवीर, दूसरे के उपकार न भूलनेवाले,
दक्ष ओर मृदुभाषी पुरुषों को भी धन-सम्पत्ति मलिन कर देती हे