Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 11, Verse 5
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 11, verse 5 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 11 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
सत्यतां मुदितां प्रज्ञां विश्रान्तिमपतापताम् ।
पीनतां वरवर्णत्वं पीतामृत इवैष्यति ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
मोह के हट जाने पर
श्रीरामजी अमृत पिये हुए पुरुष की नाई ब्रह्मरूप, परमानन्दसम्पन्न, अपरिच्छिन्नज्ञानस्वरूप,
विश्रान्तिसुखसम्पन्न और सन्तापशून्य हो जायेंगे उनका शरीर हृष्ट-पुष्ट बलिष्ठ ओर कान्तिमान् हो
जायेगा