Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 11, Verse 3
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 11, verse 3 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 11 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
इहायातु क्षणाद्राम इह चैव वयं क्षणात् ।
मोहं तस्यापनेष्यामो मारुतोऽद्रेर्घनं यथा ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामचन्द्रजी शीघ्र यहाँ आयें और यहीं पर जैसे वायु पर्वत में स्थित
मेघ को उड़ा देता है, वैसे ही हम उनके मोह को तुरन्त दूर कर देंगे