Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 11, Verse 28
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 11, verse 28 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 11 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
उत्सङ्गे पुत्र तिष्ठेति वदत्यथ महीपतौ ।
भूमौ परिजनास्तीर्णे सोंऽशुकेऽथ न्यविक्षत ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
आलिंगन करने के पश्चात्
राजा के "वत्स, मेरी गोद में बैठो” यह कहने पर श्रीरामचन्द्रजी भूमि पर अनुचरों द्वारा बिछाये गये वस्त्र
पर बैठ गये