Yoga Vasistha — Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 11, Verse 1
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Vairagya Prakarana (Dispassion), Sarga 11, verse 1 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
वैराग्य प्रकरण · सर्ग 11 · श्लोक 1
संस्कृत श्लोक
विश्वामित्र उवाच ।
एवं चेत्तन्महाप्राज्ञा भवन्तो रघुनन्दनम् ।
इहानयन्तु त्वरिता हरिणं हरिणा इव ॥ १ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामचन्द्रजी का वृत्तान्त सुनकर विश्वामित्रजी ने कहा : हे महाप्राज्ञ लोगों, श्रीरामचन्द्रजी यदि
सचमुच ही ऐसी अवस्था को प्राप्त हुए हैं अर्थात् विरक्त, दुःखी और मोहित हुए हैं, तो जैसे मृगो का
झुण्ड अपने यूथपति को लाता है वैसे ही आप लोग भी उन्हें शीघ्र मेरे पास ले आइये
सर्ग सन्दर्भ
ढसवाँ सर्ग समाप्त ग्यारहवाँ सर्ग अनुचर के मुँह से श्रीरामजी की अवस्था सुनने पर विश्वामित्रजी का उनसे उदास होने का कारण पूछना।