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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 199, Verses 1–35

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 199, verses 1–35 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 199 · श्लोक 1

संस्कृत श्लोक

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हिन्दी अर्थ

हे श्रीरामचन्द्रजी, ब्रह्मलोक पर्यन्त के ऐश्वर्य से भी बढ़ा चढ़ा हुआ परम पवित्र मोक्ष नाम का अनादि सुख गुरूओं की वाणी शास्त्रार्थबोधन द्वारा ही प्राप्त होता है और शास्त्रार्थबोध सन्त पुरुषों की संगति, नियम और शम से प्राप्त होता हे ॥ ३ ४॥ एक सौ सतानबेवाँ सर्ग समाप्त एक सौ अठानबेवाँ सर्ग प्रबुद्ध पुरुषों की निर्विक्षेप सुख स्थिति में सर्वत्र समदर्शन ही हेतु है, यह वर्णन । श्रीवसिष्ठजी ने कहा : वत्स श्रीरामचन्द्रजी, बोध दृढ़ बनानेवाली निर्विक्षेपता की सिद्धि के लिए कुछ कहे जा रहे रहस्य को आप पुनः सुनिये। शंका : जो बात पुनः पुनः उपशम प्रकरण में कही जा चुकी है उसी का यहाँ क्यों वर्णन करते हैं ? समाधान : जो बात बारंबार कही जाती है वह निपट मूर्ख के हृदय में भी जम जाती है, विद्वान्‌ के हृदय में तो कहना ही क्या है ? इसलिए मैं बार-बार कहता हूँ