Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2) · Sarga 134
एक सौ बत्तीसवाँ सर्ग समाप्त एक सौ तैंतीसवाँ सर्म कहींपर भास ने जो अत्यन्त अचम्भा आकाश से सातद्दीपों के बराबर शवका गिरना देखा, उसका वर्णन ।
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- Verse 1इस अविद्याउपाख्यान में अत्यन्त अचम्भों के वर्णन के सिलसिले में शवोपाख्यान का भास के मुख स…
- Verses 2–10कहीं आकाश में, जहाँ आप लोगों की पहुँच नहीं है, एक जगत् है | वहाँ जगमगा रही सूर्य ओर चन्द…
- Verses 11–25इस प्रकार अग्नि की प्रार्थना करने पर अग्नि ने पुनः मुझे ढाढस देते हुए मत डरो कहा ओर यह भी…
- Verse 26भगवान् अग्नि ने कहा : वत्स, जब तक शव के गिरने से उत्पन्न हुआ उत्पात पूर्णरूप से शान्त नह…
- Verses 27–29आकाशचारी सिद्ध, साध्य, अप्सराएँ, दैत्य, गन्धर्व, नाग, किन्नर, ऋषि, मुनि, षोडष मातर, यज्ञ,…
- Verses 30–57आकाशचारियों ने कहा : जो देवी महाप्रलय में संहार को प्राप्त भगवान् ब्रह्माजी की कपिल जटाओ…