Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1) · Sarga 102
एक सौ एकवाँ सर्ग समाप्त एक सौ दोवोँ सर्ग अनुज्ञा लेकर कुम्भ ऋषि के अन्तर्हित हो जाने पर विस्मित हुए राजा शिखिध्वज की चिरकाल तक विचार करने के बाद समाधि में विश्रान्ति कुम्भ ऋषि ने कहा : हे महीपते शिखिध्वज, जिस तरह यह सब विश्व उत्पन्न होता है तथा जिस तरह प्रलय को प्राप्त होता हे, वह सब कुछ अध्यारोप ओर अपवाद से पूर्ण ब्रह्मतत्त्व ही मेने आपसे कहा हे ।
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