Guru's AddaGuru's Adda

Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1) · Sarga 102

एक सौ एकवाँ सर्ग समाप्त एक सौ दोवोँ सर्ग अनुज्ञा लेकर कुम्भ ऋषि के अन्तर्हित हो जाने पर विस्मित हुए राजा शिखिध्वज की चिरकाल तक विचार करने के बाद समाधि में विश्रान्ति कुम्भ ऋषि ने कहा : हे महीपते शिखिध्वज, जिस तरह यह सब विश्व उत्पन्न होता है तथा जिस तरह प्रलय को प्राप्त होता हे, वह सब कुछ अध्यारोप ओर अपवाद से पूर्ण ब्रह्मतत्त्व ही मेने आपसे कहा हे ।

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  1. Verses 1–13हे मुनिनायक, इसको गुरु और शास्त्र से सुनकर तथा अपने विचार से मननकर भलीभाँति समझ करके साक्…
  2. Verses 14–17उसीसे अपनी पूर्णकामता का वर्णन करते है। मैं शान्ति का अनुभव कर रहा हूँ, मैं खूब तृप्त हो…